Tuesday, 15 November 2011

तेरी यादे...

तेरी यादो को लगा रखा है मैंने दिल से
सजा रखा है दिल के हर कोने में
किसी साए को देख के दूर से
लगता है फिर होगा तेरा दीदार
लेकिन अजनबी होता है वो साया
चला जाता अपनी राह
फिर ताकने लगती हुँ मै सुनी राहो को
तेरी यादो को लगा रखा है मैंने दिल से
जब कभी झरोखों से आती है महकी पवन
होता है अहसास तेरे आसपास होने का
ढ़ूढ़ने लगता है तुझे व्याकुल मन
पर मिलता है केवल शूनयता का आभास
तेरी यादो को लगा रखा है मैंने दिल से
आंखे बंद करते ही नजर आता है तेरा चेहरा
तेरे साथ बिताये शरण ,पकड़ना चाहती हुँ उन पलो को

पर आंखे खोलते ही नजर आता है
सपनो की दुनिया से दूर का वही खालीपन
जो घेरे रहता है मुझ को
तेरी यादो को लगा रखा है मैंने दिल से
सजा रखा है दिल के हर कोने में

इरा टाक

No comments:

Post a Comment