Tuesday, 15 November 2011

आंखे थक चुकी है तेरे इन्तजार में
क्या लायेगा कोई मौसम बहार इस दयार में 
सूखे पत्तो की सरसराहट,वीरान हवाओ का शोर
भूले से भी अब कोई आता नहीं इस ओर 
जिंदगी के रास्तो पर जब साथ चले थे तुम
लगता था की सदाबहार होगा ये मौसम
आशाओ का समंदर मरता था हिलौरे 
पर अचानक आंखे खाली हो गयी
सारे सपने किसी  ने चुरा लिए हो जैसे
वही रास्ते है..वही लोग है..वही मंजिले
न अब न वो रंग है..न जलतरंग के मधुर स्वर
और आंखे ..आंखे थक चुकी है तेरे इन्तजार में

इरा टाक 

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