Tuesday, 24 January 2012

अपने स्वाभिमान से गिर के लाभ उठाने की बजाय... मैं अपने स्वाभिमान पे टिके रह कर नुकसान उठाना ज्यादा पसंद करुँगी...इरा 

Instead of selling my self esteem for a petty advantage...I would rather prefer to bear a Greater Loss ...ERA

Friday, 20 January 2012

इतनी मुहब्बत...इतना इतबार ...ऐसा सुकून...आपका ही चर्चा...आपका ही सजदा...ऐसा लगता है आप मेरे खुदा बन गए हो...इरा 

Thursday, 19 January 2012

अपने जीवन में महत्वपूर्ण फैसले लेने की हिम्मत रखे ताकि कोई आपकी सफलता का श्रेय का न ले सके...और आप अपनी असफलता के लिए किसी को दोष न दे सके...इरा 

Always have Courage to take important decisions of your life so that No one can take credit of your success and You can never blame others for your failure..ERA's

Wednesday, 18 January 2012

Tribal wall art..Era's


जब आप लोगो और चीजों के पीछे भागना बंद कर देते हैं...तो वो सब आपकी ओर आना शुरू कर देते हैं...ये सत्य है...इरा

When you STOP running behind the things and the people..they all comes towards you..IT is TRUE...ERA

Sunday, 15 January 2012

जिस किसी ने मेरी मदद को मना किया है..उसके इनकार ने  मेरा हौसला ही बढाया है ..
जिस किसी ने मेरी मदद को मना किया है..उसके इनकार ने मेरा हौसला ही बढाया है ...ERA's
Anyone who has refused to help me...His refusal always INCREASES my CONFIDENCE...Era's

Thursday, 12 January 2012

जरा देखो ये कैसे ज़माने के दस्तूर है...चुप थे तो कहते थे क्यों घुटती हो मन में
अब जब कह देते है तो कहते है कि मुहजोर है...इरा 
नाकामयाबियो की बस्तियों में जी रही थी मैं
तुम मिले तो जैसे कामयाबियों का आसमान मिल गया
सुलझा रही थी मै रिश्तो की उलझने
तुम मिले तो जैसे खवाब बुनने का सामान मिल गया...इरा टाक 

Sunday, 8 January 2012

कुछ बात बने...

ख़ामोशी मुझे अब समझ नहीं आती
लफ्जो में कहो तो कुछ बात बने
बहुत जी चुके हैं  गुमनामी के अंधेरो में
रोशनी में ले चलो तो कुछ बात बने
बहुत सुन चुके हैं खामोशियाँ वीरानो की
अब कहकहो में ले चलो तो कुछ बात बने
जी है जिंदगी अब तक दूसरो की खातिर
अब कोई मेरे  लिए जिए तो कुछ बात बने
दोस्ती मुहब्बत  सिर्फ किताबो में पढ़ते आये है
जिंदगी में उतर आये तो कुछ बात बने
तुम तो कहते आये हो कुछ बात है मुझमे
अब सारा जमाना कहे तो कुछ बात बने


इरा टाक 

Saturday, 7 January 2012

एक अनदेखा अनछुआ सा ख्वाब है तू
मेरी शामो सहर में शामिल अहसास है तू
तुझे पाने की तमन्ना ऐसी है मुझको
जैसे तपती जमी पे कोई सैलाब है तू...इरा