Thursday, 29 June 2017

बरसात आई - बाल कविता

सुन्दर महकी हवा चली
पेंटिंग इरा टाक -जलरंग 
बादलों की टोली बड़ी मनचली
पेड़ पौधों ने झूम के ली अंगड़ाई
बरसात आई, बरसात आई

बच्चे बड़े सब हुए बावले
छतों , सड़कों पर निकल पड़े
सबके मन पर मस्ती छाई
बरसात आई, बरसात आई

गरम चाय और गरम पकौड़े
भुट्टे खाने सब हैं दौड़े
चढ़ी हुई है आज कढ़ाई
बरसात आई, बरसात आई

तालाब बने सडकों पर
कीचड है हर कोने पर
सरकार की फिर हुई खिचाई
बरसात आई, बरसात आई

इरा टाक 

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