Wednesday, 1 February 2017

ख़ोज-कहानी इरा टाक ( फेमिना हिंदी के दिसम्बर अंक में प्रकाशित )

ख़ोज
"क्यों बात बात पर बच्चों की तरह ज़िद करने लगी हो?"-रवि ने थोड़ा खीजते हुए कहा
"अच्छा ... आज मैं बड़ी हो गयी..? उस दिन जब मैंने कहा था कि मुझे चालीस की उम्र में,यूँ तुमसे छुप- छुप के मिलने आना पसंद नहीं, तब तो कह रहे थे -प्रेम का उम्र से क्या ताल्लुक़ ..प्रेम तो उम्र से परे होता है "
"हम्म्म ..तुमसे बातों में भला कोई जीत सका है .."
"तो कोशिश ही क्यों करते हो या ईगो हर्ट होती है मुझ से हारने में !"-रमा हँसते हुए बोली
             नीली आँखें, झक सफ़ेद रंग, गुलाबीपन लिए भूरे होंठ...रमा को देख कर कोई भी सताईस- अठाईस साल से ज़्यादा की नहीं कह सकता था पांच साल पहले एक सड़क दुर्घटना में उसके पति और दो बच्चों की मौत हो गयी थी। उसके जुड़वाँ बच्चे आयुष और अयान आठ साल के थे, उसने बड़े प्यार से उनको पाला था और अच्चानक उस हादसे ने उसकी दुनिया से जैसे सारी रौशनी , उम्मीद ही छीन ली। तब से वो हँसना- बोलना बिलकुल भूल गयी थी वो और उसका पति विजय मिल के राजापार्क में नर्सिंग होम चलाते थे । छह महीने तक वो गहरे सदमे में रहीघर वालों और दोस्तों के काफी समझाने पर उसने दोबारा नर्सिंग होम जाना शुरू किया था। घर पर बूढ़े सास ससुर थे, रमा ने खुद को क्लिनिक और घर तक सीमित कर लिया था। इसके अलावा वो कभी कहीं नहीं जाती थी लगभग हर रात रोते हुए गुज़रती थी, जीवन में एकदम सन्नाटा पसरा हुआ था उसकी खूबसूरत आँखों में  गहरी उदासी बस गयी थी सास ससुर उसे अपनी बेटी की तरह मानते थे, वो चाहते थे कि रमा दुबारा शादी करके घर बसा ले, पर रमा ने साफ़ इंकार कर दिया था
             तकरीबन दो साल पहले दिवाली की रात जब वो नर्सिंग होम से घर के लिए निकल रही थी, तो रवि लड़खड़ाता हुआ दाखिल हुआ था,उसे तेज बुखार था। दिवाली की वजह से लगभग सारा स्टाफ जा चुका था, केवल एक नर्स और वार्ड बॉय ही रुके थे, रवि की गंभीर हालत देखते हुए रमा को सारी रात उसके पास रुकना पड़ा जाँच करने पर पता चला कि उसे डेंगू हो गया था रवि छत्तीस साल का आकर्षक आदमी था यूनिवर्सिटी में फिजिक्स का असिस्टेंट प्रोफेसर था। किसी लड़की को बहुत प्रेम करता था पर उसने किसी और से शादी कर ली थी,बस इस वजह से उसने अकेले रहने का सोच रखा था । वो करीब हफ्ता भर रमा के नर्सिंग होम में एडमिट रहा इलाज़ के दौरान उसे रमा की तकलीफों का पता चल चुका था शुरू में रमा उसे दूरी रखना चाहती थी,उसे अवॉयड करती थी,पर पता नहीं क्या था जो उसे रवि की ओर खींचता था धीरे धीरे दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए काफी समझने लगे थे एक दूसरे को। दोनों ही अकेलेपन में जी रहे थे शायद इसलिए करीब आते गए इस तरह रवि दिवाली पर रौशनी बन कर उसकी ज़िन्दगी में दाखिल हुआ था
      दोनों लगभग रोज ही मिलने लगे। एक दिन रवि ने रमा को अपने घर बुलाया। जैसे ही रमा ने डोरबेल बजाई, दरवाज़ा अपने आप खुल गया। कमरे के अँधेरे को मोमबतियों की रौशनी से सजाया हुआ था। हलकी हलकी खुशबू हवा में तारी थी। रवि कहीं नज़र ही नहीं आ रहा था। दीवार पर रमा की नज़र गयी तो वो रोमांच से सिहर उठी ...बड़े बड़े अक्षरों में  आई लव यू रमा लिखा हुआ था।
“रवि रवि”-उसने जोर से पुकारा
           रवि हाथ में सुर्ख गुलाबों का एक बड़ा सा गुलदस्ता ले कर अन्दर वाले कमरे से निकला। वो सफ़ेद कुरते पजामे में बेहद शांत नज़र आ रहा था।
“अगर तुम भी मुझे प्यार करती हो तो ये गुलाब ले लो”-कहते हुए वो घुटनों के बल बैठ गया
रमा का गला आंसूओं से रुंध गया, बड़ी मुश्किल से बोल पाई
“ये क्या बचपना है रवि ?”
“मतलब तुम मुझे प्यार नहीं करती?”
“तुम जानते हो न मेरा पास्ट”
“मैं बस ये जानता हूँ कि आई लव यू मैडली”-रवि अभी भी घुटनों के बल बैठा हुआ था
“उठो न”-रमा बैचनी से बोली
“डू यू लव मी?”
                  हामी में सर हिलाते हुए रमा ने गुलाब थाम लिए। रवि ने उठ कर उसे बाँहों में भर लिया। सालों बाद रमा ने खुद को पिघलता हुआ महसूस किया। इस तरह बड़ी फ़िल्मी अंदाज़ में रवि ने अपने प्यार का इज़हार कर दिया।
        वैसे इजहार करना ज़रूरी भी नहीं होता,दोस्ती और प्यार में कोई भी आसानी से फ़र्क़ महसूस कर सकता है। रमा की तीन साल से खोई हुई हँसी, रवि की वजह से ही वापस लौट आई वो एक टीनएजर लड़की की तरह दिखने लगी,जिसने अभी-अभी प्रेम का स्वाद चखा हो! वो अपने पति और बच्चों की मौत का गम काफी हद तक भूल गयी थी। रवि को रमा में एक अच्छी जीवन साथी दिखती थी,इंटेलेक्चुअल,शांत ,गंभीर और उसे समझने वाली। रमा ने उसके बिखरे से पड़े रहने वाले घर का शानदार इंटीरियर कर दिया। रमा के सास ससुर को भी रवि पसंद था । वो बहुत सुलझे हुए लोग  थे । वो दिल से चाहते थे कि रमा की दोबारा शादी हो जाए ।  एक दो बार उन्होंने रमा को कहा भी था, पर रमा ने बात टाल दी वो इस रिश्ते को लेकर बहुत जल्दी नहीं करना चाहती थी।  रवि को स्कालरशिप मिली थी और उसे दो साल के लिए लंदन जाना था,रवि का जाने का बिलकुल मन नहीं था,रमा उसके जाने से बहुत दुखी थी,पर वो समझती थी,ये उसके लिए एक सुनहरा मौका है,इसलिए उसे जाने को ज़ोर डाल रही थी
"देखो तुम मुझसे चार साल छोटे हो और मुझे पता है तुम्हारे लिए क्या बेहतर है"-रमा ने उसे बाँहों में कसते हुए कहा
"पर मैं तुमसे दूर कैसे रहूँगा? हम शादी कर लेते हैं , फिर साथ चलते हैं "
"अरे पहले वहां थोड़ा सेट तो हो जाओ,एकदम से सब कैसे मैनेज होगा? मेरा क्लिनिक है,माँ बाबू जी हैं,मैं आती रहूंगी,तुमसे मिलने ..."
दोनों आँखों में आंसू लिए देर तक एक दूसरे को देखते रहे और एक दूसरे में घुलते गए। जब वो साथ होते तो पूरी दुनिया भूल जाते दो साल से एक एक दिन साथ बिताने के बाद दो साल के लिए अलग होना वाकई मुश्किल हो रहा था
रवि चला गया। दोनों रोज स्काइप पर वीडियो चैटिंग करते,फेसबुक पर कनेक्ट रहते,दिन में एक बार फ़ोन पर भी बात कर लेते,टेक्नोलॉजी के होने से दूरियां कम तो हो ही जाती हैं,पर फिर भी एक अकेलापन सा हमेशा रहता था। धीरे धीरे रवि व्यस्त होने लगा,रमा उसे फ़ोन करती तो उठाता भी नहीं था,स्काइप पर भी आना बंद कर दिया।
        रमा रात दिन बैचैन रहने लगी,उसकी हँसी गायब होने लगी इस बीच ससुर को हार्ट अटैक हुआ तो रमा उनकी देखभाल में लग गयी,बड़ी मुश्किल से उन्हें बचाया जा सका रवि ने ये खबर सुन कर भी केवल एक एस एम एस ही किया-“बेस्ट विशेस फॉर फ़ास्ट रिकवरी”
      रमा को अहसास होने लगा था कि रवि उससे बहुत दूर हो गया है फिर वो अपने मन को समझाती कि शायद काम की वजह से उसे वक़्त नहीं मिलता हो एक दिन उसने देखा कि रवि फेसबुक पर नज़र नहीं आ रहावो चिंतित हो गयी उसने रवि को तुरंत फ़ोन मिलाया रवि ने उसका फ़ोन नहीं उठाया वो परेशान होने लगी-
 “पता नहीं रवि को क्या हुआ होगा , अजनबी देश है ..कहीं कुछ हादसा ..नहीं नहीं ..”
उसके मन की बैचैनी बढती जा रही थी   उसने अपनी दोस्त प्रज्ञा को मिलने बुलाया, सारी बात बताई प्रज्ञा ने अपने आई डी से चेक किया तो फेसबुक पर रवि के साथ एक विदेशी लड़की की फोटो दिखी ।
रवि का स्टेटस था-"एंगेजड विथ डोरथी मैक कार्थी-फीलिंग ब्लेस्ड”
रमा के दिल को गहरा धक्का पंहुचा। प्रज्ञा गुस्से से लाल हो गयी
“इस कमीने की हिम्मत कैसे हुई तुझे चीट करने की.. तू इस पर मोलेसटेशन का केस लगा, सारी अक्ल ठिकाने आ जाएगी ”
“प्यार कभी केस लगा कर हासिल नहीं होता प्रज्ञा! अब कहने सुनने से भी क्या फायदा है? देख रवि ने मुझे ब्लाक कर दिया। प्यार होता तो धोखा क्यों देता? दो साल का प्यार केवल छह महीने दूर रहने से हवा हो गया?”-रमा की आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे
  रमा के दिल और दिमाग में ढेरों सवाल थे पर जवाब किससे मांगती? जो रवि उसकी आवाज़ सुने बिना ऑंखें नहीं खोलता था,एक दिन भी उससे बिना मिले नहीं रहता था। कई बार तो वो रात में केवल उसे देखने उसके बंगले के बाहर आ जाता था
"कितनी बार कहा है ऐसे मत आया करो कोई देख लेगा तो बदनामी होगी"
"तो तुम आ जाया करो न, इमरजेंसी का बहाना बना कर...यार मैं तो जी नहीं सकता तुम्हें देखे बिना"
               आज उसने बिना कुछ कहे सुने दूसरे से नाता जोड़ लिया । एक बार भी उसे कहने की ज़रूरत नहीं समझी! मेरे प्यार में क्या कमी रह गयी थी? ऐसे अलग हो गया जैसे वो कोई पुराना पड़ा हुआ सामान हो,जिसकी अब उसे ज़रूरत नहीं। उसने प्यार को पहली बार रवि के साथ ही महसूस किया था,मेडिकल की पढाई पूरी करते ही एक डॉक्टर से ही उसकी शादी हो गयी,फिर बच्चे,काम काज में लगे रहे कभी प्यार जैसा तो महसूस ही नहीं हुआ।
     रवि ने उसे अहसास दिलाया कि वो खूबसूरत है,कितनी केयर करता था उसकी ! उसके लिए गिफ्ट्स लाना,कई बार तो उसके लिए अपने हाथों से खाना भी बनाता था ये बातें उसकी शादीशुदा ज़िन्दगी में कभी नहीं थी वहां सिर्फ बंधन और ज़िम्मेदारी थी। इतना कुछ दे कर अचानक रवि ने सब क्यों छीन लिया? ये दो साल रमा की ज़िन्दगी के सबसे खूबसूरत साल थे,लेकिन ये उसके सबसे बड़ी तकलीफ का कारण भी बन गए थे। वो जुदाई सबसे तकलीफदेह होती है जिसमें अलग होने का कोई कारण नहीं बताया जाता पीछे छूट गए साथी को एक ही सवाल दिन-रात खाता है ...क्यों किया ऐसा ?
रमा ने खुद को अपने आप में समेट लिया,उदासी के गहरे काले बादलों ने फिर से उसे ढक लिया और फिर से वो चालीस साल की औरत बन चुकी थी। रवि अब सिर्फ उसकी यादों में था,चुभता हुआ सा!
           प्रज्ञा उसे खूब समझाती पर मन को जब समझना होता है तभी समझता है वो अनमने मन से क्लिनिक जाती और रात को भारी मन से घर लौट आती । उसकी ज़िन्दगी फिर से अस्त व्यस्त हो गयी थी । सास और ससुर उसकी ये हालत देख बहुत दुखी थे । लेकिन कुछ कर पाना उनके बस से बाहर था वो खुल कर रवि के बारे में पूछने की हिम्मत भी नहीं कर पाते थे ।
        एक दिन उसके क्लिनिक में एक लड़का आया जिसने फिनायल पी कर आत्महत्या की कोशिश की थी । उसकी माँ फूट फूट कर रो रही थी । रमा ने उसका इलाज किया, लड़का बहुत टूटा हुआ था, रो रो कर उसका बुरा हाल था
“मैं जीना नहीं चाहता, क्यों बचाया मुझे ?”-लड़के ने सुबकते हुए कहा
“क्यों ऐसा क्या हो गया बेटे? एग्जाम में फ़ैल हो गए ?”-रमा ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा
“मैं उसे बहुत प्यार करता था , हम शादी करने वाले थे पर अचानक उसने मुझसे मिलना बंद कर दिया, । मैंने बहुत कोशिश की उससे मिलने की पर वो जैसे कहीं गायब हो गयी और कल मुझे पता लगा वो पेरिस में हनीमून मना रही है। उसने मुझे चीट किया, मैं इस दर्द को बर्दास्त नहीं कर पा रहा हूँ”-लड़का कराहता हुआ बोला  
“अगर वो तुम्हें  प्यार करती तो किसी और के साथ क्यों शादी करती ? वो अपनी ज़िन्दगी में खुश है और तुम अपनी ज़िन्दगी खत्म करना चाहते हो ? कभी अपनी माँ के बारे में सोचा जिसने तुम्हें ये ज़िन्दगी दी”
रमा उसे करीब एक घंटे तक समझती रही। लड़का अब शांत था और उसने इस तकलीफ से बाहर आने का रमा से वादा किया।
 रमा जब घर लौटी तो उसका मन खुश था। उसकी सास उसके लिए कॉफ़ी बना कर लाई। कॉफ़ी पीते हुए उसने सास के वीरान चेहरे को देखा । उनकी आँखों में उसके लिए फ़िक्र दिखती थी। उसने महसूस किये की वो बहुत बूढी दिख रहीं हैं। रमा को अचानक खुद पर शर्म आने लगी। वो दूसरों को समझा रही है और खुद उसने अपने आप को अँधेरे कुएं में डाल रखा है जहाँ तक वो खुद किसी रौशनी को नहीं आने देना चाहती। उसे अहसास हुआ कि वो खुद को प्यार नहीं करती क्या मेरी खुशियाँ मेरे जीवन में किसी के होने से ही हैं ? जब तक हम खुद को प्यार करना नहीं सीख लेते तब तक किसी के होने न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता सारी दुनिया साथ छोड़ भी दे तो भी हमे खुद के साथ रहना होता है यही सच्ची ख़ुशी है वो अपनी सास के गले लग गयी
“माँ मैं अब कभी दुखी नहीं रहूंगी बस आप मेरे लिए प्यार से कॉफ़ी बनाते रहना”
उन उदास आँखों में हंसी की चमक दिखाई देने लगी
रमा ने अपने आंसू पोछे और रवि को एक मेल लिखा
“प्रिय रवि
          सगाई बहुत बहुत मुबारक तुम मुझे बता कर भी करते तो मुझे ख़ुशी होती तुम्हारी ख़ुशी सबसे ज़रूरी है खैर ! तुमने मेरे जीवन में खुशियों के रंग भरे लेकिन आज अहसास हुआ वो रंग तो मेरे ही थे, मुझे बस रंगना सीखना है...
रमा
रमा खुद को हल्का महसूस कर रही थी उसने खुद से वादा किया कि अब उसकी खुशियों उसकी सांसों के चलने तक साथ रहेंगी  
इरा टाक


 
portrait credit : Anjana Priyadarshani

2 comments:

  1. kya khun mai en bhavnawo ko sbdo me byan kr pana etna asan nhi, par ye sach hai ki rang hamre me hi hote hain aur hm sochte hain ki bahar wale ne hme rng diye hain, apki soch kafi praudh lgti hai....behtreen bhut achhi khni hai inspiring

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