Wednesday, 22 January 2014

बरसात ... A short Story by Era Tak

बरसात
" कब तक एक ही बात को लेकर बैठी रहोगी।।कितनी बार माफ़ी  मांग तो चुका हूँ। अब बिना बात ही अपना  और मेरा मूड खराब किये बैठी हो "
"काश माफ़ करना इतना आसान होता।  तुमसे ज्यादा तकलीफ मुझे है , भूल पाती  हूँ और खुश हूँ.क़भी  सोचा नहीं था तुम्हे प्रेम करना मेरे  जीवन की सबसे बड़ी तकलीफ बन जायेगा।।अब तो जैसे खुद की साँसे बचाने  को तुम्हारे साथ हूँ.क्यूंकि मैंने खुद से ज्यादा सोचा है तुम्हे। लेकिन अब कोई उमंग नहीं  रही। "
"अब ख्याल रखता तो हूँ तुम्हारा। एक बार विश्वास तो करो! बीती बातें भूल जाओ प्लीज ! "
"कोशिश कर रही हूँ.पर बरसात में अक्सर पुराने ज़ख्म भी हरे हो जाते हैं। तुम्हारे दिए हुए घाव तो अभी ताज़ा हैं "

इरा टाक (c)
Painting  Era Tak

No comments:

Post a Comment