Tuesday, 28 January 2014

. (ख्याल बहुत Confuse हैं मेरे )

सच्चा है या नहीं
पर मुझे तुमसे प्रेम है
बेहद !
बहुत सोचा
अलग अलग ढंग से
क्या क्यों कैसे
पर उत्तर न मिला !
एक बंधन है जो दिखता नहीं
और दूर होना चाहो
तो जकड लेता है !
पक्ष- विपक्ष सोचा
फायदा नुक्सान देखा
लोगों से भी पूछा
पर किया वही
जो दिल ने कहा !
माफ़ करुँगी
जब तक दिल कहेगा
छोड़ दूंगी
जब दिल कहेगा !...
बाग़ी हूँ मैं
अब रस्मों रिवाज़ों में
क्या बंधूंगी
इरा टाक।

Saturday, 25 January 2014

Friday, 24 January 2014

Thursday, 23 January 2014

Era's World Of Colors and Words...: एक सवाल...

Era's World Of Colors and Words...: एक सवाल...: एक सवाल ... बड़ा विचित्र है ये प्रेम कितना साथ घुमते थे हम घंटो फ़ोन पर बातें करते थे ढेरों कीमती तोहफ़े दिया क...

Wednesday, 22 January 2014

Era's Poetic Verses... ~ET~ In Her Voice Aired on AIR


बरसात ... A short Story by Era Tak

बरसात
" कब तक एक ही बात को लेकर बैठी रहोगी।।कितनी बार माफ़ी  मांग तो चुका हूँ। अब बिना बात ही अपना  और मेरा मूड खराब किये बैठी हो "
"काश माफ़ करना इतना आसान होता।  तुमसे ज्यादा तकलीफ मुझे है , भूल पाती  हूँ और खुश हूँ.क़भी  सोचा नहीं था तुम्हे प्रेम करना मेरे  जीवन की सबसे बड़ी तकलीफ बन जायेगा।।अब तो जैसे खुद की साँसे बचाने  को तुम्हारे साथ हूँ.क्यूंकि मैंने खुद से ज्यादा सोचा है तुम्हे। लेकिन अब कोई उमंग नहीं  रही। "
"अब ख्याल रखता तो हूँ तुम्हारा। एक बार विश्वास तो करो! बीती बातें भूल जाओ प्लीज ! "
"कोशिश कर रही हूँ.पर बरसात में अक्सर पुराने ज़ख्म भी हरे हो जाते हैं। तुम्हारे दिए हुए घाव तो अभी ताज़ा हैं "

इरा टाक (c)
Painting  Era Tak

Thursday, 9 January 2014

GREAT NEWS TO SHARE
MY PAINTING BONDING has been selected for NAtional Exh 13-14 By LAlit Kala Academy ,NEw Delhi ...
FIRST ACHIEVMENT ON NATIONAL LEVEL...I am OVERWHELMED ../.THANK YOU ALL FOR YOUR WISHES....~ET~

Wednesday, 8 January 2014

एक सवाल...



एक सवाल...

बड़ा विचित्र है ये प्रेम
कितना साथ घूमते थे हम
घंटो फ़ोन पर बातें करते थे
ढेरों कीमती तोहफ़े देते थे एक दूसरे को
सैकड़ो तस्वीरें साथ खींची थी
ताकि साथ के हर लम्हे को कैद कर सकें!
कमरे की दीवारों पर, लैपटॉप की स्क्रीन पर
हर तरफ तुम ही तुम नज़र आते थे
मेरी हर खरीददारी तुम्हारे लिए होती थी
नाम भी सिर्फ तुम्हारा ही ,होठो पर रहता था
हर फ़िक्र हर ख़ुशी बांटते थे
उम्र भर के वादे भी किये थे
कितने ही मंदिरों में उम्र भर साथ की दुआएं की थी
जैसे सैकड़ो जोड़े किया करते हैं
फिर क्यों और क्या हुआ
अचानक मेरा प्रेम विलुप्त क्यों हो गया
जबकि मैं सच्ची थी अपनी भावनाओ मे
किसी भी पल मैंने स्वार्थवश प्रेम नहीं किया था
अब यकीन आया कि प्रेम
इनमे से किसी भी चीज़ का मोहताज नहीं
होता है तो होता है
और नहीं होता तो नहीं होता ...इरा टाक ~ET~

Even A Child Knows -A film by Era Tak