आगे जाके हमने खेत के किनारे बनी एक चाय की दुकान पर कार रोक दी , वहां आठ-दस घर बने थे ,चाय वाले से बातचीत शुरू कर दी , पीछे ही उसका घर था , जिसमे कई भैसें और बकरियां बंधी हुई नज़र आ रही थी । मेरा मित्र वही बैठा रहा , मैं और मेरा भाई सामने लगे हैंडपंप पर हाथ मुँह धोने लगे , फिर सामने ही एक घर के बाढ़े में बंधी भेड़ों की तस्वीरें लेने लगे, तभी चाय वाले ने आवाज़ देकर बुला लिया , चाय पी कर जब हम चलने को हुए ,तो बाढ़े की मालकिन बाहर निकल आई और हमे आवाज़ दे कर बुलाने लगी ।
उसी समय हमारी कार के पीछे दो ट्रक भी आ कर रुक गए थे , चाय की दुकान है और सामने नल भी , तो हमने इतना ध्यान नहीं दिया , हम वापस बाढ़े की ओर बढ़ गए, बाढ़े की मालिकन लगभग पचास –पचपन साल की महिला होगी ,पर चेहरा झुर्रियों से भरा था ,चाँदी के मोटे मोटे कड़े और तोड़ ( पायल ) पहने हुए थी, हमसे खाना खाने का आग्रह करने लगी , बोली
“हम छोटी जात के नहीं हैं., आप लोग क्या बाहर से आये हो ?
हमने बोला जात पात हम नहीं मानते ,पर अभी हमे कुछ नहीं खाना , फिर वो बोली मेरी भी फोटुआ खींचो !
और अपनी ओढ़नी सही करती हुई तन के खड़ी हो गयी, भाई ने उसकी कुछ तस्वीरें ली और फिर उसे दिखाई भी कुछ लोग और भी आ गए,सब गर्दन लम्बी कर कर के देखने लगे !
सात बजने वाले थे , हमने उन लोगों से विदा ली और कार की ओर बढ़ गए।
मैंने कार स्टार्ट ही की थी कि एक साँवली सी दुबली पतली लड़की कार की खिड़की के पास आकर खड़ी हो गयी , मैंने शीशा नीचे किया...
"आपको कुछ बताना है " वो फुसफुसाई
उसकी ठंडी आवाज़ सुनकर ,एक ही पल में , दिमाग में सैकड़ों ख्याल आ कर चले गए , पर जो उसने बताया वो सोचा भी न था ...
"अभी अभी जो दो ट्रक गए हैं , वो आगे आपको रोकेंगे , मैंने उनकी बातें सुनी हैं"
हम तो प्रकृति में मगन थे , हमारा ध्यान ही नहीं गया था , उन ट्रकों पर !
वो आगे बोली
"वो आपके रुकने के थोड़ी देर बाद रुके थे और आपके चलने से पहले ही चल दिए , मैं पानी भरने गयी तो मैंने सुना कि वो आगे आपको लूटने की बात कर रहे हैं , आप ज़रा संभल के जाना ...कुछ भी हो सकता है !"
ये सुनकर हमारी क्या हालत हुई होगी ,महसूस किया जा सकता है !
खून का सारा प्रवाह दिमाग की तरफ हो गया और हाथ पैर ठन्डे पड़ गए, Adrenaline हार्मोन तुरंत अपने उच्तम स्तर पर पहुंच के मुझे भावी खतरे से बचने का संकेत देने लगा , आँखों के सामने सारे देखें , सुने, पढ़े हादसों की मिलीजुली तस्वीरें घूम गयीं, अब हमारा भी वही हाल होने वाला था, सुबह कही खेतों में पड़े हुए हमारे दुर्गति हुए निर्जीव शरीर !
तुरंत कैमरे बैग में रखें, म्यूजिक ऑफ किया, कार के सारे शीशे बंद किये और मैंने फुल स्पीड में गाडी दौड़ा दी , बस यही एक रास्ता था , दूसरा कोई रास्ता होता तो शायद वो पकड़ लेते , विराज तो डर को समझने के लिए बहुत छोटा था और दोनों लड़कों के मन की मैं नहीं जानती पर मुझे यही लग रहा था कि मैं मौत की सुरंग में जा रही हूँ , शिवाड़ घूमने का सारा आनंद, कपूर के धुएं की तरह हवा में विलीन हो गया !
शायद मैं ज़्यादा बढ़ा चढ़ा के सोच रही थी पर आज के अराजक माहौल और क्रूर होते अपराधियों से किसी तरह की दया की उम्मीद कैसे की जा सकती है ?
निर्भया काण्ड कोई भूल नहीं सकता! दिमाग काम नहीं कर रहा था , सिर्फ भय और आशंका ...कई बार लगता कि शायद उस लड़की ने ऐसे ही मज़ाक किया हो !
थोड़ी दूर वो दोनों ट्रक नज़र आ गए , सड़क इतनी पतली थी कि ओवर टेक की कम ही गुंजाईश दिखती थी , बारिश में टूटी , दबी हुई सड़क, दूर दूर तक फैले हुए खेत और उनमे पसरा हुआ सन्नाटा , हालाँकि दिन अभी ढला नहीं था , उजाला हिम्मत दे रहा था , अँधेरा अपराधी की ताकत को दुगना कर देता है और शिकार की ताकत को आधा !
गला सूख रहा था और दिमाग बड़ी तेजी से बुरे से बुरा सोचे जा रहा था , मैंने दो तीन बार कहा भी कि पुलिस को फ़ोन करो पर शायद दोनों लड़कों को स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा नहीं था , पर जब ट्रक रुके हुए देखे तो उनके भी हाथ पैर फूल गए।
ये नज़ारा मैंने लगभग तीन सौ मीटर दूर से देख लिया , आगे वाले ट्रक का ड्राइवर उतर के पीछे वाले को कुछ इशारा करने लगा , और बीच सड़क पर आ खड़ा हो गया, ट्रकों ने साइड से निकलने को बहुत कम जगह छोड़ी थी, मैंने स्पीड सौ किलोमीटर/घंटा कर ली, जबकि वहां का रास्ता तीस से ऊपर चलने लायक नहीं था, मन ही मन मैंने सोच लिया था , अगर ये न हटा तो इस ट्रक वाले को टक्कर मार दूंगी !
मैंने तो यही सीखा है, जब खतरा हो तो बचाव मत करो, हमला कर दो !
तेजी से कार को अपनी ओर आता देख वो अचानक साइड में हो गया, कार के दो टायर कच्चे रास्ते पर थे पर मैंने रफ़्तार काम नहीं की । जब तक वो इक्कीस किलोमीटर पार हो हाईवे नहीं आया , मेरी साँसे और धड़कने नार्मल नहीं हुई, साढ़े आठ बजे हम सही सलामत घर पहुंच गए।
अगर वो लड़की हमे आगाह नहीं करती, तो हम आराम से चलते , सड़क पर ट्रक और आदमी खड़ा देख शायद रुक भी जाते, और फिर न जाने हमारे साथ क्या होता वो कल्पना करते हुए भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं, ये पहली बार था , जब डर को मैंने महसूस किया और मौत की ठंडी आहट सुनी , पर वो लड़की हमारे लिए फरिश्ता ही थी, जिसने ये बताने का साहस किया वरना कई बार लोग डर और संकोच से नहीं बताते !फिर बाद में कई कई एंगल से हम कई दिनों तक उस घटना का विश्लेषण करते रहे !
कुदरत साथ थी तो बचा लाई... एक भयानक हादसा होते- होते टल गया, और मैं सुरक्षित हूँ, क्योंकि अभी इस दुनिया में मेरा हिसाब बाकी है !
- इरा टाक
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