Thursday, 23 July 2015

हुए बिना घायल !

लौट आना अतीत की सरहदों से
हुए बिना घायल
जहाँ आज भी ढेर हैं आशंकाओं के
सड़ रही हैं पछतावों की बेदफन लाशें
मुश्किल तो है !
जुटा हुआ हूँ अनवरत बनाने में
एक टाइम मशीन
जिस पर जा कर सकूँ
मरम्मत टूटे हुए सपनों की
साफ़ कर सकूँ दुर्गन्ध मारते पछतावों के ढेर
ताकि हटा सकूँ वो साइन बोर्ड
जो लगा है अतीत के जर्जर
दरवाज़े पर
जिस पर मटमैले लाल रंग से लिखा है
"अंदर आना मना है "
मैं उन्मुक्त हो विचरण करना
चाहता हूँ
वर्तमान से अतीत
अतीत से वर्तमान
के महोल्लों के बीच
हुए बिना घायल !
इरा टाक

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