Friday, 26 September 2014

मौसी जी (बिंदिया में प्रकाशित )

मौसी जी   बिंदिया में प्रकाशित
             
एक छोटे शहर के बड़े नामी मोहल्ले में मौसी जी का घर था , तंग गलियां,कचरे का जगह जगह ढेर ...नाली का पानी नाली में कम और सड़क पर ज्यादा बहता था ! वही पुराने बरगद के पास मौसी का दो मंजिला मकान  था  बरगद के नीचे  एक छोटा सा मंदिर था,  जहाँ उनकी सुबह- शाम भजन कीर्तन में बीता करती थी, बरगद पर बंदरों का एक पूरा मोहल्ला बसा हुआ था, जो रात दिन मौसी और मोहल्ले वालो का जीना मुहाल किये रहते थे 
         थी तो वो घरेलू महिला पर घर से लेकर मोहल्ले मेंऔर सभी रिश्तेदारो में उनकी  धाक  थी  रोबीला भरा हुआ चेहरा,लम्बा चर्बी से लदा हुआ शरीर, पचपन की उम्र में भी सोलह श्रृंगार किये रहती थी ,नाम था सरला ! पर यथा नाम तथा गुण वाली कहावत उन पर लागू नहीं होती थी ,तेज़ तर्रार...कैची जैसी जुबान ! मुफ्त की सलाह का भण्डार था उनके पास,जितना खर्च करती उतना ही बढ़ता जाता ! पूजा पाठ ,शादी ब्याह या प्रसव हर काम में महारत हासिल थी  सारे रीति रिवाज़ ,कर्म काण्ड उन्हें मुँह जुबानी याद थे,  महीने में पंद्रह दिन तो व्रत में कटते थे  ... फिर भी वजन कम नहीं होता ,होता भी कैसे व्रत के दिन तो मखाने ,फल और नारियल के लड्डूओं का भोग लगता था !
       
उनके पति देव कान्ता प्रसाद शहर के बड़े  ठेकेदार थे , सूखे पेड़ जैसा शरीर पर बाहर निकली हुई प्रबल तोंद ! आँखों पर हाई पावर का चश्मा जो बस सोते समय ही उतरता था ,काम धंधा अच्छा चल रहा था , सरकारी ठेके पर उनके खुद के चार  रोड रोलर भी चलते थे बगल में छोटा बैग दबा पूरे शहर में बड़ी अकड़ के चलते थे , पर घर में घुसते ही उन्हें साँप सूँघ जाता था , मौसी जी के अंधभक्त थे या कलेश  से डरते थे, ये कहना ज़रा मुश्किल होगा ! 
    
 
मौसी जी की चार औलादें थी .. दो लड़के, दो लड़कियां... दोनों लड़कियों की शादी करा के मौसी गंगा स्नान कर आयी थी । कभी कभार  राखी या भाई दूज पर ही उन दोनों का आना हो पाता ,तो मौसी जी उन्हें उनकी सासों के खिलाफ खूब भर के भेजतीं, उन्हें लगता कि उनके दोनों दामाद साक्षात देवता है पर उनकी माएं कैकई जैसी हैं !  
       छोटा लड़का  अनिल प्रसाद जिसे वो प्यार से बिल्लू कहती थीमुम्बई में एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पैकेज पर नौकरी कर रहा था , दो-तीन बार विदेश भी हो आया था मौसी जी उसे अपने पूजा पाठ का फल मानती थीं, उनकी नज़रों में चारों औलादों में केवल बिल्लू ही  काबिल निकला ! ये अलग बात थी कि उन्होंने अपनी लड़कियों को केवल बारहवीं तक ही पढ़ने का मौका दिया और शादी करा के झंझट से मुक्ति पाई ! 
    
 
सबसे बड़ा लड़का विमल प्रसाद उर्फ़ बिज्जू जो पैंतीस के लगभग हो चुका था,उनके साथ ही रहता था , वो मानसिक रूप से कमज़ोर था, बड़ी मुश्किल से दसवीं कर पाया था, अभी मौसा जी ने  इंटर का प्राइवेट फॉर्म भरवाया था  मौसी जी ने बिज्जू को हर घरेलू काम में माहिर कर रखा था ,सारे दिन उससे गधे की तरह काम करवाती थी और ज़रा सी भी गलती होने पर घंटो उसे सुनाती थी ! 
       
 
छोटा बेटा अनिल उर्फ़ बिल्लू साल में एक दो बार घर आ पाता था,उसके लिए बड़े बड़े घरों से रिश्ते भी  रहे थे , मौसी ने देख परख कर सबसे मोटा आसामी छांटा,एकलौती लड़की और दिल्ली में करोड़ों का बंगला ...लड़की देखने में ख़ास नहीं थी ! 
 
 
बिल्लू मुम्बई में अपने साथ काम करने वाली लड़की के प्रेम में था , उसने   नुकुर किया 
तो मौसी ने तीखी आवाज़ में सुनाना शुरू किया....
 "
लड़की पढ़ी लिखी है,  पैसे वाली है.... तुझे कब फुर्सत मिलती है नौकरी से, जो प्यार व्यार के चक्कर में पड़े...नौकरी वाली लड़कियां बस उंगली पर नचाती हैं लल्ला ... ! अँधेरे में सब एक सी लगती हैं ..साथ सोना ही तो है...!यहाँ माँ के पास तो साल में एक बार आता है, सारी उम्र पेट काट काट के तुझे इस काबिल बनाया और अब तेरे पर निकल आये !शादी वही होगी जहाँ मैं चाहूंगी, वर्ना मेरा मरा मुँह देखिओ ! " 
अब क्या कहना सुनना था ...बात पक्की हो गयी .!मौसी जी ने पहले ही लड़की वालों से कह दिया 
"
स्विफ्ट (कार) मेरे दरवाज़े पर खड़ी होगी तभी बारात चलेगी " 
शादी धूम धाम से हो गयी, कई दिनों  तक बुआ जी शादी में मिले दहेज़ का बखान करती रही, मारे ख़ुशी के उनका वजन दुगना हो गया था , अब सारे दिन पड़े पड़े बहु पर हुकुम चलाती और उसे रीति रिवाज़ समझतीं
नयी बहु ने मुश्किल से दो हफ्ते निकाले  और फिर मायके चली गयी, पति से बोल दिया... 
"
मुम्बई ले चलो तो साथ रहूगी..तुम्हारी माँ की गुलामी नहीं करने आयी मैं !" 
 
लड़की पैसे वाली थी ...चलनी तो उसकी थी ही .. सो लड़का बीवी और उसका सारा सामान मुम्बई ले गया...मौसी जी का मन  बहुत दुखा,लड़के और बहु को खूब खरी खोटी सुनाई ... स्विफ्ट को दरवाज़े से हिलने नहीं दिया , कम से कम कुछ तो हिस्से रहना चाहिए था ! 
      
रात दिन मौसा जी के सामने रोना रोती रहती... पर मोहल्ले में यही कहती  "बहु तो यही रहना चाहती थी..पर बेटा भी तो अकेला है..कब तक खुद रोटियां बना बना के खायेगा...? 
अब उन्हें बड़े बेटे की चिंता सताने लगी,जो भी मिलता बस एक ही बात छेड देती.... "अभी तो मैं और इसके पापा ज़िंदा हैं ,  ..उसके बाद क्या होगा मेरे लाल का ..?आजकल कौन किसका होता है ...भोला है ..इसे तो सब बेच के खा जाएँ..एक समझदार बहु  जाये तो घर सम्भाल ले और इसे भी !कोई लड़की तो बताओ..कैसी भी चलेगी ..पैसे की क्या कमी है..बस सम्भालने वाली चाहिए" 
लोग हाँ हाँ तो कर देते , पर दबी छुपी जुबान में कहते"कौन करेगा इस बिज्जू से शादी ..पाजामे का नाड़ा तक तो बाँध नहीं पाता?इससे अच्छा तो लड़की को गूंगे बहरे से ब्याह दें... "
 
 
     कान्ता प्रसाद जी भी कहते...
  
"क्यों किसी लड़की की ज़िन्दगी खराब करें..मैंने इतना इंतज़ाम कर दिया है कि हमारे बाद भी बिज्जू अच्छे से कमा खा लेगा ! " 
लेकिन मौसी जी लगन की पक्की थी , उन्हें बिज्जू का ब्याह करवाना था,रिश्ते बताने वाले पंडित को खूब दक्षिणा दी, आखिर मेहनत रंग लाई ,पंडित जी एक लड़की का रिश्ता लेकर आये ...मुश्किल से 19 - 20  साल की बेहद खूबसूरत लड़की .. ,बी  दूसरे वर्ष का इम्तेहान दे रही थी , 4 बहनें और एक भाई ...वो सबसे बड़ी थी !पैसे के नाम पर इतना ही था कि बड़ी मुश्किल से दो  वक़्त का खाना नसीब होता था
उनके शहर से लगभग साठ किलोमीटर दूर एक कसबे में लड़की का घर था, मौसी जी ने तुरंत गाडी निकलवाई और मौसा जी को लेकर पहुँच गयी देखने !
..
लड़की के पिता सरकारी स्कूल में मास्टर थे  , उन्हें लड़के की उम्र से कोई ख़ास आपत्ति नहीं थी, इससे ज्यादा चिंता एकलौते लड़के की पढाई और बाकी चार लड़कियों के ब्याह की थी
मौसी को लड़की एक नज़र में पसंद गयी ,.उन्होंने तुरंत अपनी सोने की चेन निकाल कर उसे पहना दी
अब हम समधी हुए , बस हमे तो बहु  चाहिए , जो घर सम्भाल ले...बाकी खर्चे की चिंता आप  करेंआपके बेटे की पढाई का खर्च भी हम उठा लेंगे और बाकी  बच्चिओं की शादी भी करवा देंगे..आखिर अब बिज्जू की सालियाँ है.. भगवान ने बहुत दिया है , कोई कमी नहीं !" 
 
लड़की की माँ  चाय रखते हुए धीरे से बोली..
 
"एक बार लड़के को देख लेते तो...." 
इस पर पंडित बोल उठा ...."अरे लड़का सोना है सोना !  ...घर बैठे ऐसा रिश्ता आया  ,जे तो नसीब है तुमरी कन्या का. ! वरना तो लेन (लाइनलगी है...पर बहन जी बहुत दयालु है..जब तुम्हारे घर की हालत सुनी तो बोली दहेज़ देने वाले तो बहुत मिल जायेंगे..पर इतना लालच किसलिए...? साथ लेकर क्या जाना है..बस कन्या सुन्दर और सुशील हो !
       
लड़की के पिता ने रसोई में जा कर बीवी  को समझाया .... "बड़ी लडकी अच्छे घर  में ब्याह दी गयी तो बाकी भी अच्छे घरों में जाएँगी लड़का अगर पच्चीस  का भी मिले और खाने को  हो..ऊपर से दहेज़ देना पड़े तो क्या फायदा..दहेज़ भी कहाँ से दें ...ले दे कर दो कमरो का मकान ही तो है अपने पास ..वो भी बेच दें क्या ?" 
 
बस रिश्ता पक्का हो गया...लड़की भी बड़ी खुश ...पहली बार सोने की चेन जो पहनी , ससुराल में कार थीवो तो पैसे  होने के कारण रिक्शे में भी नहीं बैठ पाती थी.... मौसी जी लड़की को कार में बैठा के पास के बाज़ार में ले गयी और उसकी पसंद से खूब साड़ियां और साज श्रृंगार का सामान दिलवाया ..लड़की तो हवा में तैरने लगी ..क़स्बे में सब उसके भाग्य की चर्चा कर रहे थे 
मौसीजी ने ये बात सबसे छुपा के रखी.. "अरे ज़माना बुरा है..तुरंत नज़र लग जाती है..एक बार शादी हो जाये फिर सबको बता देंगे ." 
 
खास लोगो को खबर की और छोटी सी बारात ले कर लड़की विदा करवा लाये ..इतना मौका भी  दिया कि लड़की एक नज़र लड़के को देख भी पाये 
 
ये तो राम ही जाने कि लड़की की अपने से 15 -16 साल बड़े मानसिक रूप से कमज़ोर आदमी से कैसे बन पाई..?? 
 
मौसी जी हर समय उसे काम में लगाये रखती और साथ कही भी ले जाती तो एक  हाथ लम्बा घूँघट करवा कर ...शुरू में तो बहु बहुत सहमी सहमी रहतीधीरे धीरे उसने बगावत करनी शुरू कर दी ..बहु ने पढाई पूरी करने की इच्छा जाहिर की
 
जिसे  थोड़े बहुत कलेश के बाद मान लिया गया ...बहु रो रो कर अपनी हर इच्छा बिज्जू से पूरी करवा लेती 
और मौसी को इस बात का तनाव रहने लगा कि बिज्जू हाथ से निकल गया... जोरू का गुलाम हो गया है
 बहु ने एम ए फर्स्ट क्लास पास  किया  ,फिर बीएड में उसका दाखिला आसानी से हो  गया , अब वो मौसी की एक न सुनती, मौसी एक कहती तो वो तीन सुनाती !
बिज्जू को भी कई बार कमरे से बाहर निकाल देती, बेचारे कान्ता प्रसाद कोशिश करते कि ज़्यादा से ज़्यादा घर से बाहर रहें, घर में घुसते ही मौसी सारी  भड़ास उन पर निकालती, जिससे उनका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता
वो कई बार दबे स्वर में कहते " ये सब मुसीबत तुम्हारी  खड़ी की हुई है, मैंने तो पहले ही मना  किया था बिज्जू की शादी करने को ! "  
     बिज्जू की बीवी सुन्दर और चंचल होने की वजह से छोटी बहु ने अपने पति अनिल को मौसी जी के पास जाने पर बैन लगा दिया था , उसे अपने पति पर बिलकुल भरोसा न था
     
 
एक दिन देर शाम तक बहु घर नहीं लौटी , काफी ढूंढा,मोहल्ले में हड़कम्प मच गया,  बाद में पता चला कि  घर से सारे गहने भी गायबथे , अगली सुबह पता चल गया था कि वो अपने साथ बीएड करने वाले एक काबिल लड़के के साथ  फरार हो चुकी थी ! एम से दोनों में प्रेम सम्बन्ध चल रहा था
मौसी जी की जेल में दो साल काटने के बाद उसने अपना रास्ता खुद चुन लिया ! आखिर पैसा कब तक उसे बांध पाताउसकी उम्र के हिसाब से उसकी कुछ इच्छाएं थी 
मौसी जी कई बार उसके घर गयी, डराया धमकाया , पुलिस केस लगाने की धमकी दीपर लड़की ने आने से साफ़ मना कर दिया और दहेज़ उत्पीड़न का मामला दर्ज करा दिया ...बड़ी मुश्किल से  तीन   लाख रुपया दे कर लड़की से पीछा छूटा 
लड़की का नाम "चर्चा" था... वो सारे मोहल्ले और शहर में उनकी चर्चा करा गयी ..आज चर्चा दिल्ली में किसी डिग्री कॉलेज में पढ़ा रही है ..वहीँ अपने साथ काम करने वाले एक प्रोफेसर से उसकी शादी हो चुकी है !
अब मौसी जी एक ही बात कहती हैं ..."भलाई का ज़माना ही नहीं रहा ...भगवान ने भी मुझे ठगा ही है...!" 
 
उन्होंने पूजा पाठ करना छोड़ दिया है ..अब वो मांगने पर भी सलाह देने से बचने लगी हैं.. .मौसा जी की घर में भी थोड़ी बहुत चलने लगी है ..और मौसी का वजन संतुलित सा होने लगा है ! 

इरा टाक 

3 comments:

  1. वाह बहुत खूब कहानी की लय अंत तक मजबूत है .और अंत बहुत सार गर्भित तथा अंत की २ लाइन में मौसी का परिवेर्तन बहुत सुंदर किया है

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