अभिशप्त
विशाल को गायब हुए काफी समय हो चुका था,अपने से आधी उम्र की लड़की को लेकर फरार था, लड़की भी अपने पति को छोड़ के गायब हुई थी । पुलिस में रिपोर्ट हुई ,पर कोई सुराग न मिला ।कई दिनों तक लड़की के रिश्तेदारों का आना और धमकाना लगा रहा ।आस पड़ोस वाले सहानुभूति जताने आ जाते। घर पर हाहाकार मचा हुआ था।
" "कुछ करा दिया होगा, हमारे लड़के पर वरना ऐसे कैसे चला जाता ? लड़की को सोचना चाहिए था ,बाल बच्चों वाला घर उजाड़ गयी डायन !" विशाल की माँ सबसे एक ही बात रो रो के कहती
लोगो की यही मानसिकता होती है, अपनी औलाद की गलती कभी स्वीकार नहीं करेंगे ,उसका इल्ज़ाम भी दूसरे के माथे ड़ाल देंगे ।
विशाल की पत्नी पूनम परेशान थी ,किससे अपनी तकलीफ कहे .. वो अपमान और नकारे जाने का दर्द झेल रही थी । दो बच्चे छोटे थे ,वो समझ पाने की स्थिति में नहीं थे कि उनके पापा अचानक कहाँ गए?
सास से तो उसकी बोलचाल पहले भी अक्सर बंद ही रहती थी ,अब तो और ताने मिलते थे।
" "बाँध नहीं सकी अपने आदमी को ..! .परेशान करती थी, इसलिए चला गया ।अगर घर में औरत प्यार दे ,तो मज़ाल आदमी बाहर मुँह मारे। "
परेशान होकर मायके चली आई ।मायके में पैसे की कोई कमी नहीं थी ,पूनम ने भाई से वही उसके बच्चो का एडमिशन कराने को कहा ,पर दो महीने बाद भी उसके बच्चे घर पर ही थे , भाभी खिंची खिंची सी रहती और भतीजा उसके बच्चो को खूब पीटा करता था ,अब माँ बाप भी ज़्यादा दखल नहीं देते थे ।
एक दिन उसने भाभी को कहते सुना "कुँवर सा भाग गए तो हमारी क्या गलती ..पूरा दान दहेज़ दे कर विदा किया था अब वही रहे ,पूरा हक़ है नन्द बाई सा का ...यहाँ कब तक रहेंगी ,बाबू की पढ़ाई भी डिस्टर्ब होती है "
और घर में सभी उनसे सहमत थे ,सो पूनम वापस ससुराल लौट आई,मायके की घुटन अब उससे बर्दाश्त नहीं होती थी ।अपने जब ताने मारते हैं, तो सहन करना और भी मुश्किल हो जाता है।
वो बी ए पास थी, पर ज्ञान तभी काम आता है, जब उसका उपयोग हो ,वरना मिट्टी हो जाता है ।कई सालों से घर में रही थी ,बाहर निकलने की आदत कभी नहीं रही ,डर लगता था ज़माने से , ज़्यादा घुलने मिलने का स्वभाव नहीं था अब तो और खामोश हो गयी थी ।घर के काम निपटा के अपने कमरे में घुस जाती .जब बच्चे स्कूल से आ जाते तो उसके मुँह से थोड़ी बहुत आवाज़ निकलती ।
ससुर की पेंशन के भरोसे घर चल रहा था। तंगी होने लगी , बच्चों की फीस भी जमा करनी थी सो विशाल का पुराना कंप्यूटर बेचा ,मुश्किल से तीन हज़ार रुपये मिले, सास ने स्टोर में जाके कुछ और पुराना बेकार सामान खंगाला, पर सामान बेच कर कहीं घर चल पाता है?
विशाल गाड़ी, मोटर साइकिल सब बेच गया था ,वो तो शुक्र है कि घर उसके नाम नहीं था, वरना आज सब सड़क पर होते ।घर बड़ा था पर रोजमर्रा की ज़रूरतों के लिए पैसा चाहिए ।काफी विचार करने के बाद घर का ऊपरी हिस्सा किराये पर उठा दिया गया ,थोड़ा किराया आये तो कुछ काम चले ।घर के बाहर काफी जगह खाली पड़ी हुई थी जिस पर ४ कमरे बनाये जा सकते थे पर पैसा नहीं था । सास ने वहाँ सब्जियां उगानी शुरू की, जितना घर में हो जाये अच्छा ,कुछ तो बचत होगी ।
वो सब रात दिन मर मर के जी रहे थे ,कुछ तकलीफें मरने के साथ ही खत्म होती हैं ।घर में श्मशान सा माहौल रहता है ,बच्चे भी मज़बूरी समझ के पाले जा रहे हैं ।विशाल के माँ बाप बस मौत से कुछ राहत के इंतज़ार में दिन काट रहें हैं ,गलती उनकी कुछ भी नहीं थी पर शर्म से उनका लोगो से मिलना जुलना कम हो गया है ।
१ साल बीत चुका है ,विशाल का सुराग मिल चुका है ,कुछ सुलह और लेन देन हो गया है, तो लड़की वालो ने केस वापिस ले लिया ,अब उसकी मज़बूरी हो गयी है ,अपने पाप को उम्र भर ढ़ोना।वो रात दिन घुटता है ,सारे दोस्त ,काम पहचान छूट गयी।वो लड़की जो उसके प्यार में अंधी होकर पति को छोड़ कर भागी थी, अब रात दिन कलेश करती है ,पर वापस भी कैसे लौटे पहले ही अपने आप भागी थी सब उसे मारा मान चुके ,उसके लिए वापस लौटने के सारे दरवाजे बंद हैं । केस वापस ले लिया यही अहसान है वरना जेल जाना पड़ सकता था..
अब उम्र भर वो दोनों एक गुमनाम सी ,क्लेश भरी ज़िन्दगी जीने को अभिशप्त हैं क्यूंकि ये ज़िन्दगी उन्होंने खुद चुनी या हो सकता है इस घुटन से मुक्ति पाने को कोई नया अपराध करें ।
पूनम उम्र भर अपना नसीब कोसते हुए दूसरो पर निर्भर रहने को अभिशप्त है, क्यूंकि उसने भी ये ज़िन्दगी खुद चुनी ।सिन्दूर लगाये ,बिछिया,चूड़ियाँ पहने वो किस रिश्ते का तमगा लिए दिन बिता रही है ?बच्चे धीरे धीरे बड़े हो रहे हैं, एक नीरस वातावरण में जिसमे सिर्फ अवसाद और निराशा है ,वो भी अपनी ज़िन्दगी की राह थोड़ी समझ आने पर चुन लेंगे ,आखिर सब अपनी समझ के हिसाब से अपनी ज़िन्दगी चुनते हैं।
इरा टाक ( सर्व अधिकार सुरक्षित ) ~ET~
चित्र : इरा टाक
विशाल को गायब हुए काफी समय हो चुका था,अपने से आधी उम्र की लड़की को लेकर फरार था, लड़की भी अपने पति को छोड़ के गायब हुई थी । पुलिस में रिपोर्ट हुई ,पर कोई सुराग न मिला ।कई दिनों तक लड़की के रिश्तेदारों का आना और धमकाना लगा रहा ।आस पड़ोस वाले सहानुभूति जताने आ जाते। घर पर हाहाकार मचा हुआ था।
" "कुछ करा दिया होगा, हमारे लड़के पर वरना ऐसे कैसे चला जाता ? लड़की को सोचना चाहिए था ,बाल बच्चों वाला घर उजाड़ गयी डायन !" विशाल की माँ सबसे एक ही बात रो रो के कहती
लोगो की यही मानसिकता होती है, अपनी औलाद की गलती कभी स्वीकार नहीं करेंगे ,उसका इल्ज़ाम भी दूसरे के माथे ड़ाल देंगे ।
विशाल की पत्नी पूनम परेशान थी ,किससे अपनी तकलीफ कहे .. वो अपमान और नकारे जाने का दर्द झेल रही थी । दो बच्चे छोटे थे ,वो समझ पाने की स्थिति में नहीं थे कि उनके पापा अचानक कहाँ गए?
सास से तो उसकी बोलचाल पहले भी अक्सर बंद ही रहती थी ,अब तो और ताने मिलते थे।
" "बाँध नहीं सकी अपने आदमी को ..! .परेशान करती थी, इसलिए चला गया ।अगर घर में औरत प्यार दे ,तो मज़ाल आदमी बाहर मुँह मारे। "
परेशान होकर मायके चली आई ।मायके में पैसे की कोई कमी नहीं थी ,पूनम ने भाई से वही उसके बच्चो का एडमिशन कराने को कहा ,पर दो महीने बाद भी उसके बच्चे घर पर ही थे , भाभी खिंची खिंची सी रहती और भतीजा उसके बच्चो को खूब पीटा करता था ,अब माँ बाप भी ज़्यादा दखल नहीं देते थे ।
एक दिन उसने भाभी को कहते सुना "कुँवर सा भाग गए तो हमारी क्या गलती ..पूरा दान दहेज़ दे कर विदा किया था अब वही रहे ,पूरा हक़ है नन्द बाई सा का ...यहाँ कब तक रहेंगी ,बाबू की पढ़ाई भी डिस्टर्ब होती है "
और घर में सभी उनसे सहमत थे ,सो पूनम वापस ससुराल लौट आई,मायके की घुटन अब उससे बर्दाश्त नहीं होती थी ।अपने जब ताने मारते हैं, तो सहन करना और भी मुश्किल हो जाता है।
वो बी ए पास थी, पर ज्ञान तभी काम आता है, जब उसका उपयोग हो ,वरना मिट्टी हो जाता है ।कई सालों से घर में रही थी ,बाहर निकलने की आदत कभी नहीं रही ,डर लगता था ज़माने से , ज़्यादा घुलने मिलने का स्वभाव नहीं था अब तो और खामोश हो गयी थी ।घर के काम निपटा के अपने कमरे में घुस जाती .जब बच्चे स्कूल से आ जाते तो उसके मुँह से थोड़ी बहुत आवाज़ निकलती ।
ससुर की पेंशन के भरोसे घर चल रहा था। तंगी होने लगी , बच्चों की फीस भी जमा करनी थी सो विशाल का पुराना कंप्यूटर बेचा ,मुश्किल से तीन हज़ार रुपये मिले, सास ने स्टोर में जाके कुछ और पुराना बेकार सामान खंगाला, पर सामान बेच कर कहीं घर चल पाता है?
विशाल गाड़ी, मोटर साइकिल सब बेच गया था ,वो तो शुक्र है कि घर उसके नाम नहीं था, वरना आज सब सड़क पर होते ।घर बड़ा था पर रोजमर्रा की ज़रूरतों के लिए पैसा चाहिए ।काफी विचार करने के बाद घर का ऊपरी हिस्सा किराये पर उठा दिया गया ,थोड़ा किराया आये तो कुछ काम चले ।घर के बाहर काफी जगह खाली पड़ी हुई थी जिस पर ४ कमरे बनाये जा सकते थे पर पैसा नहीं था । सास ने वहाँ सब्जियां उगानी शुरू की, जितना घर में हो जाये अच्छा ,कुछ तो बचत होगी ।
ससुर कहते "अब उसका क्या भरोसा कब लौटे ..तुम कुछ काम करो.. कमाना सीखो ,नहीं तो घर में ट्यूशन ही ले लो ..हम भी आखिर कब तक के हैं ,बहु थोड़ा हिम्मत करो "
सास को भी दया आती आखिर गलती तो उनके लड़के की थी ,बहु से भले ही न हो पर पोतों से तो उनका गहरा लगाव था ,उनकी दुर्गत होते देख वो पीड़ा से भरी रहती ,बड़ी तकलीफ होती मन में, जीवन की शाम में एकलौता लड़का भारी दाग लगा गया ,एक बार भी उसने परिवार का विचार नहीं किया .. प्यार में ,नहीं! इसे प्यार कहना ठीक नहीं होगा ,ये तो सिर्फ वासना और खुदगर्जी है अपने से १२-१५ साल छोटी लड़की के साथ सबंध बनाना और फिर बाद में सब तबाह कर के गायब हो जाना ,कोई इस तरह कैसे कर सकता है? सच में इंसान का मन समझ पाना बहुत मुश्किल होता है और कई बार वो खुद अपना मन नहीं समझ पाता।सिर्फ अपनी खुदगर्जी के चलते उसने अपने घर के ४ लोगो का जीवन नरक जैसा कर दिया था ,उसके साथ गयी लड़की के परिवार ने लड़की को मारा हुआ मान लिया था।प्रेम कभी इतना खुदगर्ज़ नहीं हो सकता ,वासना बड़े अपराध करा देती है और फिर उस अपराध को छुपाने के लिए और बड़े अपराध हो जाते हैं ।
पर पूनम
ने अपनी
किस्मत से
लड़ने का
कोई प्रयास नहीं किया
,वो उसी
हाल में
रहना चाहती
थी । पूनम
जवान थी
,खूबसूरत थी
,पढ़ी लिखी
थी ,चाहती
तो हिम्मत
कर के
आगे पढाई
कर सकती
थी साथ
ही साथ
घर में
पढ़ाने का
या कोई
भी छोटा
काम शुरू
कर सकती
थी, पर
पता नहीं
क्यों कई
औरतें अपने
आत्मस्वाभिमान को
कभी जगा
ही नहीं
पाती।सारी
उम्र घर
की चारदीवारी
में गुज़ार
देती हैं
,कितना कुछ
जीवन में
कर सकती
हैं , पर
नहीं शायद
बचना चाहती
हो! ज़्यादा
काम से,
भाग दौड़
से, थकान
से ! पर
दूसरों पर
निर्भर हो
कर, घर
पर पड़े
रहने में
क्या थकान
नहीं होती
होगी ? क्या
थकान और
भय, आत्मसम्मान
पर भारी
होता है
?वो सब रात दिन मर मर के जी रहे थे ,कुछ तकलीफें मरने के साथ ही खत्म होती हैं ।घर में श्मशान सा माहौल रहता है ,बच्चे भी मज़बूरी समझ के पाले जा रहे हैं ।विशाल के माँ बाप बस मौत से कुछ राहत के इंतज़ार में दिन काट रहें हैं ,गलती उनकी कुछ भी नहीं थी पर शर्म से उनका लोगो से मिलना जुलना कम हो गया है ।
१ साल बीत चुका है ,विशाल का सुराग मिल चुका है ,कुछ सुलह और लेन देन हो गया है, तो लड़की वालो ने केस वापिस ले लिया ,अब उसकी मज़बूरी हो गयी है ,अपने पाप को उम्र भर ढ़ोना।वो रात दिन घुटता है ,सारे दोस्त ,काम पहचान छूट गयी।वो लड़की जो उसके प्यार में अंधी होकर पति को छोड़ कर भागी थी, अब रात दिन कलेश करती है ,पर वापस भी कैसे लौटे पहले ही अपने आप भागी थी सब उसे मारा मान चुके ,उसके लिए वापस लौटने के सारे दरवाजे बंद हैं । केस वापस ले लिया यही अहसान है वरना जेल जाना पड़ सकता था..
अब उम्र भर वो दोनों एक गुमनाम सी ,क्लेश भरी ज़िन्दगी जीने को अभिशप्त हैं क्यूंकि ये ज़िन्दगी उन्होंने खुद चुनी या हो सकता है इस घुटन से मुक्ति पाने को कोई नया अपराध करें ।
पूनम उम्र भर अपना नसीब कोसते हुए दूसरो पर निर्भर रहने को अभिशप्त है, क्यूंकि उसने भी ये ज़िन्दगी खुद चुनी ।सिन्दूर लगाये ,बिछिया,चूड़ियाँ पहने वो किस रिश्ते का तमगा लिए दिन बिता रही है ?बच्चे धीरे धीरे बड़े हो रहे हैं, एक नीरस वातावरण में जिसमे सिर्फ अवसाद और निराशा है ,वो भी अपनी ज़िन्दगी की राह थोड़ी समझ आने पर चुन लेंगे ,आखिर सब अपनी समझ के हिसाब से अपनी ज़िन्दगी चुनते हैं।
इरा टाक ( सर्व अधिकार सुरक्षित ) ~ET~
चित्र : इरा टाक